जुबां कुछ कह नहीं पाती

जुबां कुछ कह नहीं पाती
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तेरे लिए धड़क रहे दिल,
संकेत है कुछ करती।
पर बात जो दिल में है,
जुबां कुछ कह नहीं पाती।

तेरी अदाएँ मेरे दिल को भा रही,
पर दिल की बातें जुबां पर आ नहीं पाती।
तेरी मुस्कुराहटें मेरे दिल का धड़का रही,
कहने को आतुर हो जाता मेरा मन,
पर जुबां कुछ कह नहीं पाती।

—————- मनहरण

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