Oct 21, 2016 · 1 min read

जीवन से जन्म हुआ,जीवन ही तो लक्ष्य है:: जितेन्द्र कमल आनंद ( पोस्ट७१)

राजयोगमहागीता:: सारात्सार::: घनाक्षरी ५/२१
————–, जीवनसे जन्म हुआ,जीवनही तो लक्ष्य है
जीवनको सत्य शिव सुंदर बनाना है ।
होकर निर्द्वंद्ध और होकर विदेही – सम
राजयोग से ही मन — मंदिर बनाना है ।
समग्र मानवता ही आती इस परिधि में ,
आत्मकेंद्रित होके हितकर बनाना है ।
बनके ब्रह्माण्डीय ,गेह का आभास न कर,
हित परमार्थ के सुखकर बनाना है ।।५/२१!!

—–+ जितेंद्रकमलआनंद::::: रामपुर( उ प्र ) भारत

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