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23 Apr 2022 · 1 min read

जिम्मेदारी और पिता

जिम्मेदारीयों के बोझ तले दबा हुआ पिता
बच्चों की ख़ातिर फिर भी खुश रहता है पिता.

बीबी से भी कभी शिकायत नहीं कर पाता?
बीबी बच्चों के लिए हर पल जीता है पिता.

घर परिवार की जिम्मेदारी मे भागमभाग
हर मेहनतकशी करता है जो पिता.

घर का चूल्हा जले दो वक्त की रोटी मिले
खून पसीने एक कर देता है पिता.

क्या उसकी अब अपनी कोई खुशियां नहीं?
शायद बच्चों की खुशियों में ही खुश हो लेता है पिता.

घर परिवार खुशहाल रहे यही जिम्मेदारी निभाने
तपीश धूप या बारीश हो मेहनत मजूरी करता है पिता

कवि- डाॅ. किशन कारीगर
(©काॅपीराईट)
(काव्य प्रतियोगिता के लिए मौलिक एवं स्वरचित रचना)

Language: Hindi
Tag: कविता
7 Likes · 18 Comments · 704 Views
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