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26 Jun 2022 · 1 min read

जिन्दगी का सफर

मेरी जिन्दगी की सफर कि यादे
कुछ इस तरह का रहा
खुशियाँ कम ,गम पर जिन्दगी
मेरा ज्यादा टिका रहा
रोने के कई बहाने मिले
खुशी की तलाश चलता रहा।

जिन्दगी में कितने बार हुए लहूलुहान
न पूछो तुम मुझसे यारों
क्योकि चोट गैरो से नही
सदा अपनो से मिलता रहा
गैर होते तो लड़ भी लेता
अपनों की मार था
इसलिए चूपचाप सहता रहा।

~अनामिका

Language: Hindi
Tag: शेर
6 Likes · 4 Comments · 206 Views
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