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जिंदगी जीने में मजा आ गया

जिंदगी जीने में मजा आ गया
गमगीन शाम में मुस्कुराना आ गया
ठोकरों से सीख हमको ये मिली
बेजान पत्थरों से सर बचाना आ गया
जब बहारों के कदम भू पर पड़े
फूल को भी खिलखिलाना आ गया
छोड़ सब जब रंग गए हम बेरंग हुए
इंद्रधनुष को रंग लगाना आ गया
जब दर्श पाया अपने अन्तर्मन का
आंखों में सपने सजाना आ गया
मंजिल खुद है इशारे करने लगी
राह पर “दीप” पग बढ़ाना आ गया

…..जारी

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