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Jun 6, 2021 · 1 min read

जिंदगी की पहेली

जिंदगी की पहेली कब किसको समझ आई है
जैसी जिसे मिली वैसी उसने बताई है
कई रूप रंग है एहसास बिश्वास भी है कई
हारना सभी को एक दिन, ऐसी बिसात लगाई है
हर पल घटती है पर बढ़ने का भरम देती है
भरम और सत्य के बीच अनदेखी सिलाई है
इस जाल में फंसने या निकलने, किसकी खुशी करें
आत्मा अमर है ये बात तो कान्हा ने भी बताई है
जब छोड़ना है सब एक दिन तो किसकी चाह करें
ये मेरी माँ ये बाप ये बहन ये मेरा भाई है
ऊपर वाले की हर बात में कितनी चतुराई है देखो
चींटी की तरह जी लो मिठाई ही मिठाई है
जिंदगी की पहेली भी वाह क्या पहेली है
जितना डूबोगे इसमे उतनी गहराई है

1 Like · 2 Comments · 148 Views
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