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21 Mar 2023 · 1 min read

💐प्रेम कौतुक-498💐

ज़िंदगी को सम्भालना ये किसी हश्र से कम नहीं,
दिल में समाकर न मिले वो,किसी हश्र से कम नहीं,
ज़िंदगी की सफ़ में सब रक़्स के नुमाइंद हैं वे सब,
रक़्स-ए-शरर कह दूँ उन्हें,ये किसी हश्र से कम नहीं।

©®अभिषेक: पाराशरः “आनन्द”

Language: Hindi
33 Views
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