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18 Oct 2016 · 1 min read

जय बाला जी: मॉग सिया की सेंदुर पूरित: जितेंद्रकमलआनंद( पोस्ट३२)

जयबालाजी:: ताटंक छंद : ३१

मॉग सिया की सेंदुर पूरित ,लख कपि ने भी मल डाला
देखा मॉ ने ,मन में सोचा, सुत कितना भोला- भाला ।
किया ज्ञात जब कारण उनसे , अम्ब आपसे सीखा है।
निहित विपुल कल्याण कंत का , सरल ह्रदय बोले बाला

—- जितेंद्रकमलआनंद

Language: Hindi
Tag: मुक्तक
162 Views
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