Oct 18, 2016 · 1 min read

जयबालाजी: पानी बहते रहने से ही,सरित- सलिल:: जितेन्द्र कमल आनंद ( पोस्ट३८)

पानी बहते रहने से ही सरित सलिल बनता निर्मल ।
जैसे दूँज- चॉद चलने से पूर्ण इन्दु बनता उज्जवल ।
” कमल” संत भी विमल हंसवत् मोतीको चुगनेवाला
चलता रहता एक गॉवसे अन्य गॉवको ही , बाला !!

—– जितेन्द्रकमल आनंद

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