Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
Aug 19, 2016 · 1 min read

**जब तुम लौट कर आओ तो शायद**

**के जब तुम लौट कर आओ::स्मृति**

हौसला टूट चुका है, अब उम्मीद कहीं जख्मी बेजान मिले शायद,
जब तुम लौट कर आओ तो सब वीरान मिले शायदll

वो बरगद का पेड़ जहां दोनों छुपकर मिला करते थे,
वो बाग जहां सब फूल तेरी हंसी से खिला करते थे,
वो खिड़की जहां से छुपकर तुम मुझे अक्सर देखा करती थी,
वो गलियां जो हम दोनों की ऐसी शोख दिली पर मरती थीं,
वो बरगद,वो गलियां, वो बाग बियाबान मिले शायद,
के जब तुम लौट कर आओ……………l

खेत-खलिहान तक तुमको बंजर मिले,
मेरी दुनिया का बर्बाद मंजर मिले,
ख्वाबों के लहू और लाशें मिलें,,
और तुम्हारी जफाओं का खंजर मिले,
तबाहियों का ऐसा पुख्ता निशान मिले शायद,
के जब तुम लौट कर आओ…………ll

यहां जो हंसता मुस्कुराता मेरा आशियाना था,
जिसके हर ज़र्रे में बस तुम्हारा ठिकाना था,
ये शहर जो मेरे साथ मुस्कुराया करता था,
मेरे साथ तुम्हारे बाजुओं में बिखर जाया करता था,
वहां उजड़ा हुआ शहर, खंडहर सा इक मकान मिले शायद,
के जब तुम लौट कर आओ…… I

तुम आओ तो शायद ना मिलें ये बाग बहारें,
ये शहर मिले ना मिलें मेरे घर की दीवारें,
तुम बहार थी मैं फूल था मैं अब नहीं खिलूं,
के जब तुम लौट कर आओ तो शायद मैं नहीं मिलूं,
मगर कंधे पर अपनी लाश ढोता एक इंसान मिले शायद,
के जब तुम लौट कर आओ…………ll

All rights reserved.

-Er Anand Sagar Pandey

211 Views
You may also like:
हम भारत के लोग
Mahender Singh Hans
एक वीरांगना का अन्त !
Prabhudayal Raniwal
नित हारती सरलता है।
Saraswati Bajpai
दर्द के रिश्ते
Vikas Sharma'Shivaaya'
लूं राम या रहीम का नाम
Mahesh Ojha
आजमाइशें।
Taj Mohammad
✍️इंतज़ार के पल✍️
"अशांत" शेखर
आईना झूठ लगे
VINOD KUMAR CHAUHAN
महाभारत की नींव
ओनिका सेतिया 'अनु '
"बेटी के लिए उसके पिता "
rubichetanshukla रुबी चेतन शुक्ला
तमन्ना ए कल्ब।
Taj Mohammad
हायकु मुक्तक-पिता
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
पर्यावरण पच्चीसी
मधुसूदन गौतम
बेवफाओं के शहर में कुछ वफ़ा कर जाऊं
Ram Krishan Rastogi
प्रलयंकारी कोरोना
Shriyansh Gupta
* राहत *
Dr. Alpa H. Amin
महका हम करेंगें।
Taj Mohammad
कलम
Dr Meenu Poonia
हायकु
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
# हे राम ...
Chinta netam " मन "
चाय-दोस्ती - कविता
Kanchan Khanna
नदी की अभिलाषा / (गीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
दरिया
Anamika Singh
इन्सानों का ये लालच तो देखिए।
Taj Mohammad
दादी की कहानी
दुष्यन्त 'बाबा'
आज की नारी हूँ
Anamika Singh
मां ‌धरती
AMRESH KUMAR VERMA
तुम्हारे शहर में कुछ दिन ठहर के देखूंगा।
Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI
निशां मिट गए हैं।
Taj Mohammad
खुदा बना दे।
Taj Mohammad
Loading...