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Aug 7, 2016 · 1 min read

जज्बा ए मर्दां

मुक्तक,,,
तुम्हारा इक इक बोल क़तरा है ,
शहद का।
तुम्हारा इक इक बोल मिसरा है,
अहद का।
मंज़िल करेगी ख़ैरमक़दम देखना,
अवधूत,।
तुम्हारा इक इक बोल जजबा है,
जहद का।

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