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छोड़ दो

ख्वाहिशे है
बहुत कुछ पाने की
रोज नए नए
बातो को भुलाने की

बोझ बन जाती है जिंदगी
जब बहुत कुछ
रखा जाता है
मन मस्तिष्क के पटल पर
अपने ही लाश को ढो कर
चलना पड़ता है
छोड़ दो बहुत कुछ
जो नाकारा,
अनुपयोगी है
बेकार है
नकारात्मक है
छोड़ दो उसे
खाली करो मन के मकान को
आने दो नयी रोशनी
हवा और पानी को
सकारात्मकता को

– आनंदश्री

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