Oct 17, 2016 · 1 min read

चुपके से

कब वो चुपके से उतर
हृदय की भूमि पर
मन बंकर को अनायास
ध्वस्त कर चला गया

जतनों से जो पुष्प प्रेम
उगाये थे कदाचित्
मात्र एक ही स्ट्राइक से
वीभत्स चीत्कार कर उठे

डॉ मधु त्रिवेदी

72 Likes · 174 Views
You may also like:
🌷🍀प्रेम की राह पर-49🍀🌷
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
🌺प्रेम की राह पर-45🌺
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
हर अश्क कह रहा है।
Taj Mohammad
रावण का मकसद, मेरी कल्पना
Anamika Singh
An Oasis And My Savior
Manisha Manjari
बचपन
Anamika Singh
The Sacrifice of Ravana
Abhineet Mittal
निर्गुण सगुण भेद..?
मनोज कर्ण
कांटों पर उगना सीखो
VINOD KUMAR CHAUHAN
लाडली की पुकार!
Dr. Arti 'Lokesh' Goel
युद्ध हमेशा टाला जाए
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
"ममता" (तीन कुण्डलिया छन्द)
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
Nature's beauty
Aditya Prakash
आंखों में तुम मेरी सांसों में तुम हो
VINOD KUMAR CHAUHAN
अपने पापा की मैं हूं।
Taj Mohammad
"मैंने दिल तुझको दिया"
Ajit Kumar "Karn"
माँ, हर बचपन का भगवान
Pt. Brajesh Kumar Nayak
*स्मृति डॉ. उर्मिलेश*
Ravi Prakash
साहित्यकारों से
Rakesh Pathak Kathara
इश्क़ में क्या हार-जीत
N.ksahu0007@writer
एक मुर्गी की दर्द भरी दास्तां
ओनिका सेतिया 'अनु '
पिता अम्बर हैं इस धारा का
Nitu Sah
The Buddha And His Path
Buddha Prakash
क्यों ना नये अनुभवों को अब साथ करें?
Manisha Manjari
तुम्हीं हो पापा
Krishan Singh
"एक नई सुबह आयेगी"
पंकज कुमार "कर्ण"
चलो गांवो की ओर
Ram Krishan Rastogi
ममता की फुलवारी माँ हमारी
Dr. Alpa H.
कविता पर दोहे
Ram Krishan Rastogi
उम्मीद की रोशनी में।
Taj Mohammad
Loading...