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Jul 16, 2022 · 1 min read

चांद

छिप जाता है जो बरसात की काली रातों में ।
दिखाता है कभी झलक काली बदली में से वो ।
दिल में उठता है कोई दर्द रह-रह कर मेरे ।
इस चांद की तरह कभी नजर आ जाते तुम भी मुझे।

इसकी झलक देख मिलता सुकून है जैसे इन आंखों को।
तुम्हारी झलक दिख जाती तो आता सुकून इस दर्दे दिल को मेरे।

ऐ चांद मेरी आंखें तो ना देख सके उन्हें ।
तुम ही सुना देना दर्दे हाल मेरे दिल का।
जो कभी याद भी ना करते हो चाहे मुझे।

मेरी आंखों का इंतजार तो मिट नहीं सकता ।
मेरे दिल के दर्द को सुकून मिल नहीं सकता ।
अगर देखें तुझे ऐ चांद वो ,तो कहना मन तो मेरा तुम्हारे पास ही रहता है।

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