Sep 21, 2016 · 1 min read

गज़ल :– आज मातम छा गया घनघोर मेरे गाँव में !!

ग़ज़ल :– आज मातम छा गया घनघोर मेरे गाँव में !!
बहर :–
2122–2122-2122–212

रमल मुसद्दस मुजाहिफ गज़ल

आज मातम छा गया घनघोर मेरे गाँव में !
चंद कुत्तों नें मचाया शोर मेरे गाँव में !!

जब कहीं गोली की आहट से गरजता आसमां !
दहशतों में नाचता मनमोर मेरे गाँव में !!

गीध से ताके सियासी, हादसों की गंध को !
बस सियासत हो रही चहुंओर मेरे गाँव में !!

आज ये सूरज की लाली रक्तमय लगती मुझे !
बादलों सी दिल को चीरे भोर मेरे गाँव में !!

उस समन्दर में भँवर करने की देरी आज क्यों ?
जिसके लहरों की “अनुज” हिलकोर मेरे गाँव में !!

अनुज तिवारी “इन्दवार”

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