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9 May 2022 · 1 min read

गौरैया बोली मुझे बचाओ

गोरैया बोली मुझे बचाओ
अस्तित्व ना मेरा सकल मिटाओ
मैं हूं तुम्हारी मित्र पुरानी
बंद हुआ है दाना पानी
रहने को भी जगह नहीं है
अगली पीढ़ी कहां से लाऊं
कैंसे मैं अस्तित्व बचाऊं
पहले जैसा माहौल नहीं है
दुनिया भी गंभीर नहीं है
भोर में ही उठ जाती हूं
फिर मैं तुम्हें जगाती हूं
गीत प्रेम के गाती हूं
कीट पतंगे खाती हूं
मर जाती हूं बिन पानी के
तारों से टकराती हूं
कच्चे घर अब रहे नहीं
घोंसला बना नहीं पाती हूं
चलता रहा अगर ऐंसे ही
दुनिया से विदा हो जाऊंगी
फिर कैसे तुम्हें जगाऊंगी
बचपन की मैं मित्र चिरैया
नजर नहीं आऊंगी

सुरेश कुमार चतुर्वेदी

Language: Hindi
Tag: कविता
5 Likes · 2 Comments · 415 Views
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