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Oct 31, 2016 · 1 min read

गौमाता

गौमाता

तैंतीस कोटि देवों ने भी
जिसे बनाया अपना धाम ,
ऐसी गौ माता को हम
निश – दिन करें प्रणाम ।।

गौमाता के हित में देखो
भगवन भी गोपाल बने ,
ग्वाल बाल संग लीला करके
श्री गोवर्धन लाल बने ।।

हम मानुष होकर भी देखो
मान न गौ को दे पाते हैं ,
राह राह भटकती है वो
आश्रय भी न बना पाते हैं ।

दूध दही माखन उसका
सबको बड़ा लुभाता है ,
औषधि का रूप है गौरस
लाभ बहुत पहुँचाता है ।।

मानुष ज्ञानी होकर भी तुम
क्यों अज्ञानी हो बने हुए ,
उसे हटा लो चौराहों से
वहाँ गौभक्षी हैं खड़े हुए ।।

गौ रक्षा का संकल्प करो
सम्मान उसका वापस लाओ ,
पूजनीय बने वो घर घर में
संदेश धरा पर है फैलाओ ।।

डॉ रीता
आया नगर , नई दिल्ली

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