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Sep 26, 2017 · 1 min read

गुलशन

गुलशन सजते है गुलों से
पतझड़ से, खारो से नहीं।

भंवरा कलि को फूल बना देते
भले उसकी सच्ची कदर होती नहीं ।

फूल महल में पले या कुटिया में
प्यास में दोनो की कोई अन्तर नहीं ।

माली कोई भी हो मगर ख्याल रहे
पतझड़ में भी गुलशन ऊजड़े नहीं ।।

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