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गुरुवंदनम्

*अनुष्टुप छंदे*

अक्षरस्याक्षरपदं ,करोति सुगमं सदा।
ज्ञानाक्षरेण संयुक्तः तस्मै श्री गुरवे नमः।।

नम: ब्रह्मस्वरूपाय, नमस्ते ज्ञानसागर:।
नियोजको हितार्थे च, तस्मै वंदे गुरुपदौ।।

अंकित शर्मा ‘इषुप्रिय’

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