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Jul 23, 2019 · 1 min read

गीत :- जाम में हुस्न थोड़ा मिलाती गई ।

गीत :– जाम में हुस्न थोड़ा मिलाती गई
✍? अनुज तिवारी ” इंदवार”

अपने होठों से उनको पिलाती गई ।
जाम में हुस्न थोड़ा मिलाती गई ।

दिल में हलचल हुई चैन खोने लगा ,
फिर ये मौशम जवां और होने लगा ,
नाज़ नखरे उन्हें मैं दिखाती गई ।
जाम में हुस्न थोड़ा मिलाती गई ।

गीत गाते गए गुनगुनाते गए ,
एक दूजे को हम आजमाते गए ,
प्यार ही प्यार उन पर लुटाती गई ।
जाम में हुस्न थोड़ा मिलाती गई ।

शाम रौशन हुई औ नशा छा गया ,
फ़िर मुहब्बत का हमको मजा आ गया ,
शर्म के अपने घूंघट हटाती गई ।
जाम में हुस्न थोड़ा मिलाती गई ।

अपनी बाहों में मुझको झुलाते रहे ,
ऐसे हाथों से जुल्फ़ें हटाते रहे ,
मैं तो आंखें शरम से झुकाती गई ।
जाम में हुस्न थोड़ा मिलाती गई

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