Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Nov 2016 · 1 min read

गीतिका

गीतिका
पदांत –है , समान्त –इले, मात्रा प्रति पद – २४

लगता तो यही कि हम पहली बार मिले हैं
मिलना विछुड़ना जन्म जन्म के सिलसिले हैं |

चाहता रहा सदा प्यार का इज़हार करूँ
न जाने संकोच से ये लबे क्यों सिले हैं |

जब से मिले है हम, दिल में वसंत छा गया
मन उपवन में देखो फुल अनेक खिले हैं |

कदम से कदम मिलाकर ज्यों चलतें हैं साथ
साथ हमारा चले खुशियों के काफिले हैं |

जिंदगी बदलती है रंग शुरू से अंत तक
रंग बदलता जीवन में तो बहुत गिले है |

जनता से करते वादा, जनता के नेता
टूटे वादा पुन पुन ,बन गये सिलसिले हैं |

© कालीपद ‘प्रसाद’

278 Views
You may also like:
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
Ram Krishan Rastogi
अपनी ताकत को कलम से नवाजा जाए
कवि दीपक बवेजा
✍️सच बता कर तो देखो ✍️
Vaishnavi Gupta (Vaishu)
"हैप्पी बर्थडे हिन्दी"
पंकज कुमार कर्ण
हे तात ! कहा तुम चले गए...
मनोज कर्ण
इश्क की खुशबू।
Taj Mohammad
शीर्षक: "ये रीत निभानी है"
MSW Sunil SainiCENA
बनेड़ा रै इतिहास री इक झिळक.............
लक्की सिंह चौहान
एक महान सती थी “पद्मिनी”
पंकज कुमार शर्मा 'प्रखर'
इतना मत लिखा करो
सूर्यकांत द्विवेदी
कहते हैं कि बदलते हैं लोग इस दुनिया में ।
Annu Gurjar
चुनाव (मुक्तक )
Ravi Prakash
भूख
Sushil chauhan
जलने दो
लक्ष्मी सिंह
पिता जी का आशीर्वाद है !
Kuldeep mishra (KD)
कवि
विजय कुमार 'विजय'
दूध होता है लाजवाब
Buddha Prakash
खामोशी
Anamika Singh
🌺🍀परिश्रम: प्रकृत्या सम्बन्धेन भवति🍀🌺
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
सही गलत का
Dr fauzia Naseem shad
शुभचिंतक, एक बहन
Dr.sima
✍️सुर गातो...!✍️
'अशांत' शेखर
हम और तुम जैसे…..
Rekha Drolia
"शेर-ऐ-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह की धर्मनिरपेक्षता"
Pravesh Shinde
सदियों की साज़िश
Shekhar Chandra Mitra
रहे इहाँ जब छोटकी रेल
आकाश महेशपुरी
आकाश
AMRESH KUMAR VERMA
बाबू जी
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
दिल की ये आरजू है
श्री रमण 'श्रीपद्'
'दुष्टों का नाश करें' (ओज - रस)
Vishnu Prasad 'panchotiya'
Loading...