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ग़ज़ल-(सोच के सहरा में खड़ा है)- राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’

ग़ज़ल -सोच के सहरा में खड़ा है

खुशियों में उर ग़मों में क्यों इंसान पड़ा है।
हर शख्स यही सोच के सहरा में खड़ा है।।

मंदिर मस्ज़िद के तू फ़र्को में पड़ा है।
ईश्वर हर इक दिलों के ही अंदर जड़ा है।।

जल्दी में हरिक काम बिगड़ता जरूर है।
चखकर तो देखो सब्र का फल मीठा बड़ा है।।

ईमान की रोटी से मिले चैंनों सकूं भी।
हराम की कमाई का फल मिलता सड़ा है।।

इस दौर में लालच की इन्तहा तो देखिए।
भाई से ही भाई क्यों अक्सर लड़ा है।।

हैवान कत्ले आम ही तो रोज़ कर रहे।
इंसान उसे देख कर क्यों सहमा खड़ा है।।

सब लोग यही कहते जो देखा वही सच है।
‘राना’ तो अपनी बात पे दमखम से खड़ा है।।
***
© राजीव नामदेव “राना लिधौरी”,टीकमगढ़*
संपादक “आकांक्षा” पत्रिका
जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़
अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी,
टीकमगढ़ (मप्र)-472001
मोबाइल- 9893520965
Email – ranalidhori@gmail.com
Blog-rajeevranalidhori.blogspot.com

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