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Jun 15, 2016 · 1 min read

ग़ज़ल :– दुनियाँ बसाओं तो तुम्हें जानें !!

ग़ज़ल :– दुनियाँ बसाओ तो तुम्हे जानें !!
अनुज तिवारी “इन्दवार”

मेरे अरमान के गुलशन सजाओ तो तुम्हे जानें !
बेशक प्यार की रस्में निभाओ तो तुम्हें जानें !!

यहाँ बर्बाद हो कर भी मेरे अहसास जिंदा हैं !
मेरे अहसास की दुनियाँ बसाओ तो तुम्हें जानें !!

ज़रूरत है तुम्हें मेरी मुझको भी ज़रूरत है !
ज़माना छोड़ कर मेरे पास आओ तो तुम्हें जानें !!

तुम्हारे प्यार की बातें हमें हरदम लुभाती हैं !
ज़रा हमदम हमें अपना बनाओ तो तुम्हें जाने !!

चहरे पे छिपे चहरे यहाँ अक्सर रूलाते हैं !
चहरे से ज़रा घूंघट हटाओ तो तुम्हें जानें !!

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