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May 25, 2022 · 1 min read

गम आ मिले।

ढूंढने निकले थे खुशी।
बे- हिसाब गम आ मिले।।

गंदा हुआ ज़मीर मेरा।
खुद का इश्राक खो दिए।।

इश्राक=चमक

ताज मोहम्मद
लखनऊ

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