Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings

गमदीदा हूँ

गमदीदा हूँ पर एहसास कुछ खास सा है,
ऐसा लगा वो दूर नहीं, वो मेरे पास सा है,

नृग की मन्नतों में एहसास जन्नतों का है,
ऐसा लगा उनकी दुआओं के हाथ उठे है,
और दिल में हलचल, वो मेरे पास सा है,

कुछ बर्फानी सी लहर, महसूस हुई चेहरे पे,
ऐसा लगा धुप में भी मौसम बरसात सा है,

जाने क्यों याद आ गया तेरे गलों को छूना,
अचानक क्यों दिल धड़क उठा है सीने में,
ऐसा लगा जैसे तू मेरे कंही आस पास सा है,

गमदीदा हूँ पर एहसास कुछ खास सा है,
ऐसा लगा वो दूर नहीं, वो मेरे पास सा है,
तनहा शायर हूँ

208 Views
You may also like:
दो पल मोहब्बत
श्री रमण 'श्रीपद्'
जय जय भारत देश महान......
Buddha Prakash
धन्य है पिता
Anil Kumar
आंखों पर लिखे अशआर
Dr fauzia Naseem shad
पिता का साया हूँ
N.ksahu0007@writer
बेरोज़गारों का कब आएगा वसंत
Anamika Singh
वाक्य से पोथी पढ़
शेख़ जाफ़र खान
इन्सानियत ज़िंदा है
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
पहचान...
मनोज कर्ण
'परिवर्तन'
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
लाचार बूढ़ा बाप
jaswant Lakhara
बरसात आई झूम के...
Buddha Prakash
ये बारिश का मौसम
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
भोजपुरी के संवैधानिक दर्जा बदे सरकार से अपील
आकाश महेशपुरी
जागो राजू, जागो...
मनोज कर्ण
जाने क्या-क्या ? / (गीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
जुद़ा किनारे हो गये
शेख़ जाफ़र खान
ओ मेरे !....
ईश्वर दयाल गोस्वामी
"सूखा गुलाब का फूल"
Ajit Kumar "Karn"
पिता की नसीहत
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
पिता
Dr.Priya Soni Khare
यही तो इश्क है पगले
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
घनाक्षरी छन्द
शेख़ जाफ़र खान
पवनपुत्र, हे ! अंजनि नंदन ....
ईश्वर दयाल गोस्वामी
भारत भाषा हिन्दी
शेख़ जाफ़र खान
बदल जायेगा
शेख़ जाफ़र खान
मांँ की लालटेन
श्री रमण 'श्रीपद्'
टूट कर की पढ़ाई...
आकाश महेशपुरी
हमनें ख़्वाबों को देखना छोड़ा
Dr fauzia Naseem shad
मजबूर ! मजदूर
शेख़ जाफ़र खान
Loading...