Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
9 Jun 2022 · 1 min read

गंगा दशहरा

गंगा दशहरा पुण्य काल में
मांँ गंगा का अवतरण हुआ,
राजा सगर के प्रपौत्र
भगीरथ का तप सफल हुआ।
भागीरथी की अविरल धारा
गंगोत्री में प्रकट हुई,
हरिद्वार आकर माता फिर
धरती मांँ से लिपट चली।
उत्तर भारत की जीवनधारा,
सदियों से भाग्य विधाता है,
नौ-वहन, सिंचाई, जल-विद्युत,
तीर्थाटन की जन्मदाता है।
उद्योगों से दूषित होती,
जलजीवन खतरे में आया है,
सघन बस्तियों के अस्तित्व पर
संकट का बादल छाया है।
गंगा दशहरा के पुण्य काल में,
यह प्रण हमें लेना होगा,
‘नमामि गंगे’ के संकल्प को
पूर्ण योग से करना होगा।

मौलिक व स्वरचित
श्री रमण
बेगूसराय

Language: Hindi
6 Likes · 8 Comments · 407 Views
You may also like:
कोशिशों में तेरी
Dr fauzia Naseem shad
'शान उनकी'
Godambari Negi
जलवा ए अफ़रोज़।
Taj Mohammad
ये ख्वाब न होते तो क्या होता?
सिद्धार्थ गोरखपुरी
कुछ वक्त के लिए
Kaur Surinder
न तुमने कुछ न मैने कुछ कहा है
ananya rai parashar
# मेरे जवान ......
Chinta netam " मन "
✍️वो सब अपने थे...
'अशांत' शेखर
मेरा कृष्णा
Rakesh Bahanwal
Writing Challenge- कला (Art)
Sahityapedia
तड़पती रही मैं सारी रात
Ram Krishan Rastogi
अजीब कशमकश
Anjana Jain
*धन व्यर्थ जो छोड़ के घर-आँगन(घनाक्षरी)*
Ravi Prakash
जब पंखुड़ी गिरने लगे,
Pradyumna
प्रेम पर्दे के जाने """"""""""""""""""""""'''"""""""""""""""""""""""""""""""""
Varun Singh Gautam
गन्ना जी ! गन्ना जी !
Buddha Prakash
शेर
Rajiv Vishal
घृणित नजर
Dr Meenu Poonia
चाहत कुर्सी की जागी
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
मेरी वाणी
Seema 'Tu hai na'
पर्यावरण
सूर्यकांत द्विवेदी
घर वापसी
Shekhar Chandra Mitra
आब अमेरिकामे पढ़ता दिहाड़ी मजदूरक दुलरा, 2.5 करोड़ के भेटल...
श्रीहर्ष आचार्य
कशमकश
Anamika Singh
करुणा के बादल...
डॉ.सीमा अग्रवाल
वही मेरी कहानी हो
Jatashankar Prajapati
“ অখনো মিথিলা কানি রহল ”
DrLakshman Jha Parimal
Mohd Talib
Mohd Talib
शब्दों से परे
Mahendra Rai
कौन सी खूबसूरती
जय लगन कुमार हैप्पी
Loading...