Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Jan 2023 · 1 min read

ख्वाहिशों ठहरो जरा

ख्वाहिशों ठहरो जरा गिन लूं अपनी साँसों को,
हुई हैं खर्च कहाँ घाटा या मुनाफे में।

-सतीश सृजन, लखनऊ

Language: Hindi
1 Like · 48 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
तन्हा हूं,मुझे तन्हा रहने दो
तन्हा हूं,मुझे तन्हा रहने दो
Ram Krishan Rastogi
एहसासों से भरे पल
एहसासों से भरे पल
सुशील मिश्रा (क्षितिज राज)
ऐ मौत
ऐ मौत
Ashwani Kumar Jaiswal
दोहा
दोहा
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
💐प्रेम कौतुक-346💐
💐प्रेम कौतुक-346💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
ख़ुद को खूब निरेख
ख़ुद को खूब निरेख
Chunnu Lal Gupta
हिन्दी दोहा शब्द- फूल
हिन्दी दोहा शब्द- फूल
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
You are painter
You are painter
Vandana maurya
धोखा
धोखा
Sanjay
स्वागत है नवजात भतीजे
स्वागत है नवजात भतीजे
Pooja srijan
मुझको मेरा अगर पता मिलता
मुझको मेरा अगर पता मिलता
Dr fauzia Naseem shad
जी रहे हैं सब इस शहर में बेज़ार से
जी रहे हैं सब इस शहर में बेज़ार से
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
बहुत कुछ था कहने को भीतर मेरे
बहुत कुछ था कहने को भीतर मेरे
श्याम सिंह बिष्ट
दुर्गा माँ
दुर्गा माँ
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
"वर्तमान"
Dr. Kishan tandon kranti
नज़र नज़र का फर्क है साहेब...!!
नज़र नज़र का फर्क है साहेब...!!
Vishal babu (vishu)
शमा से...!!!
शमा से...!!!
Kanchan Khanna
मैं अचानक चुप हो जाती हूँ
मैं अचानक चुप हो जाती हूँ
ruby kumari
"मेरी नयी स्कूटी"
Dr Meenu Poonia
जय भगतसिंह
जय भगतसिंह
Shekhar Chandra Mitra
चार कदम चलने को मिल जाता है जमाना
चार कदम चलने को मिल जाता है जमाना
कवि दीपक बवेजा
जिसे पश्चिम बंगाल में
जिसे पश्चिम बंगाल में
*Author प्रणय प्रभात*
फ़र्क़ नहीं है मूर्ख हो,
फ़र्क़ नहीं है मूर्ख हो,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
उसने मुझको बुलाया तो जाना पड़ा।
उसने मुझको बुलाया तो जाना पड़ा।
सत्य कुमार प्रेमी
वर्णमाला हिंदी grammer by abhijeet kumar मंडल(saifganj539 (
वर्णमाला हिंदी grammer by abhijeet kumar मंडल(saifganj539 (
Abhijeet kumar mandal (saifganj)
ग़ज़ल
ग़ज़ल
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
महंगाई का दंश
महंगाई का दंश
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
थोपा गया कर्तव्य  बोझ जैसा होता है । उसमें समर्पण और सेवा-भा
थोपा गया कर्तव्य बोझ जैसा होता है । उसमें समर्पण और सेवा-भा
Seema Verma
यूही सावन में, तुम बंबूनाती रहो
यूही सावन में, तुम बंबूनाती रहो
Basant Bhagwan Roy
The Moon!
The Moon!
Buddha Prakash
Loading...