Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
Aug 28, 2016 · 1 min read

ख्वाब आँखों में |अभिषेक कुमार अम्बर

ख्वाब आँखों में जितने पाले थे,
टूट कर के बिखर ने वाले थे।
जिनको हमने था पाक दिल समझा,
उन्हीं लोगों के कर्म काले थे।
पेड़ होंगे जवां तो देंगे फल,
सोच कर के यही तो पाले थे।
सबने भर पेट खा लिया खाना,
माँ की थाली में कुछ निवाले थे।
आज सब चिट्ठियां जला दी वो,
जिनमें यादें तेरी सँभाले थे।
हाल दिल का सुना नहीं पाये,
मुँह पे मजबूरियों के ताले थे।

©अभिषेक कुमार अम्बर

1 Like · 147 Views
You may also like:
ज्यादा रोशनी।
Taj Mohammad
जिंदगी का राज
Anamika Singh
मिलन की तड़प
Dr. Alpa H. Amin
जिदंगी के कितनें सवाल है।
Taj Mohammad
सुकून सा ऐहसास...
Dr. Alpa H. Amin
विदाई की घड़ी आ गई है,,,
Taj Mohammad
विद्या पर दोहे
Dr. Sunita Singh
हाय गर्मी!
Manoj Kumar Sain
✍️वो उड़ते रहता है✍️
"अशांत" शेखर
उड़ी पतंग
Buddha Prakash
आओ तुम
sangeeta beniwal
【6】** माँ **
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
जिन्दगी की रफ़्तार
मनोज कर्ण
इन तन्हाइयों में तुम्हारी याद आयेगी
Ram Krishan Rastogi
# बोरे बासी दिवस /मजदूर दिवस....
Chinta netam " मन "
तन्हा ही खूबसूरत हूं मैं।
शक्ति राव मणि
छंदानुगामिनी( गीतिका संग्रह)
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
मुस्कुराना सीख लो
Dr.sima
पिता और एफडी
सूर्यकांत द्विवेदी
हवा
AMRESH KUMAR VERMA
जय जगजननी ! मातु भवानी(भगवती गीत)
मनोज कर्ण
गंगा से है प्रेमभाव गर
VINOD KUMAR CHAUHAN
जीत-हार में भेद ना,
Pt. Brajesh Kumar Nayak
गंगा अवतरण
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
मिटटी
Vikas Sharma'Shivaaya'
वो कली मासूम
सूर्यकांत द्विवेदी
हमारी जां।
Taj Mohammad
चाँद ने कहा
कुमार अविनाश केसर
उन बिन, अँखियों से टपका जल।
Pt. Brajesh Kumar Nayak
Time never returns
Buddha Prakash
Loading...