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* खोजता आज स्वअस्तित्व अपना *

विषय- खोज/तलाश
रेंगा काव्य शैली
5+7+5+7+7+5+7+5+7+7—–
* माँ दरबार
मनोकामना पूर्ण
तलाश मेरी
संपूर्ण फलीभूत
इच्छाएँ हैं संतुष्ट

* खोजता आज
स्वअस्तित्व अपना
रात्रि का तम
प्रकाश है फैलाए
चंद्रज्योत्सना लिए

* विभा छा जाए
प्रकाश की तलाश
उर रोशन
आदित्य उषा लाए
प्रभात बेला लिए

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