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“क्योंकि मैं नारी हूँ……”

क्योंकि मैं नारी हूँ……

मैं वात्सल्य हूँ
मैं श्रृंगार हूँ
मैं मीत हूँ
मैं प्रीत हूँ
स्नेह में बंधी हूँ
मगर उन्मुक्त हूँ
प्रेम को समेटे हूँ
मगर अँगार हूँ
जीवन की चेतना हूँ
मगर सृष्टि की वेदना हूँ
मन से निर्मल हूँ
मगर निस्तेज नहीं
हूँ प्रवाहित विचारों से
विवश नहीं प्रतिबंधित प्रेम से
बँधी हूँ संस्कारों से
मगर उन्मुक्त हूँ
सपनों के आवागमन से
क्योंकि मैं नारी हूँ…..
@निधि…

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