Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
Nov 7, 2016 · 1 min read

कोहरा

बहुत सोचा कि
अश्को को भुला
फिर मुस्कुराऊंगी
कभी मुझसे
कभी तुमसे
गल्तियां
हो ही जाती हैं
न बिसरी
धूप की रंगत
तेरे सपने
मेरे अपने
न जाने कब
ढली फिर सांझ
कोहरे
छा ही जाते हैं

1 Like · 1 Comment · 210 Views
You may also like:
भारत भाषा हिन्दी
शेख़ जाफ़र खान
सेक्लुरिजम का पाठ
Anamika Singh
# महकता बदन #
DR ARUN KUMAR SHASTRI
शहर को क्या हुआ
Anamika Singh
मजदूर
Anamika Singh
गुजर रही है जिंदगी अब ऐसे मुकाम से
Ram Krishan Rastogi
दिल की आवाज़
Dr fauzia Naseem shad
✍️मोहब्बत की राह✍️
"अशांत" शेखर
कमली हुई तेरे प्यार की
Swami Ganganiya
पुस्तैनी जमीन
आकाश महेशपुरी
" मैं हूँ ममता "
मनोज कर्ण
अराजकता बंद करो ..
ओनिका सेतिया 'अनु '
प्राकृतिक आजादी और कानून
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
" हैप्पी और पैंथर "
Dr Meenu Poonia
🌺प्रेम की राह पर-58🌺
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
**मानव ईश्वर की अनुपम कृति है....
Prabhavari Jha
दिल की ख्वाहिशें।
Taj Mohammad
त्याग की परिणति - कहानी
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
ग़ज़ल -
Mahendra Narayan
** बेटी की बिदाई का दर्द **
Dr. Alpa H. Amin
Little baby !
Buddha Prakash
ख्वाब
Swami Ganganiya
छंदों में मात्राओं का खेल
Subhash Singhai
जंगल में एक बंदर आया
VINOD KUMAR CHAUHAN
आज की पत्रकारिता
Anamika Singh
हिन्दी साहित्य का फेसबुकिया काल
मनोज कर्ण
ब्रेक अप
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
कर्म का मर्म
Pooja Singh
मौन में गूंजते शब्द
Manisha Manjari
स्कूल का पहला दिन
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
Loading...