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हिय बसाले सिया राम

आराम चाहें जीवन , तज दे व्यर्थ काम ।
पढ़ें -लिखें पल नहिं खोय,करले बचपन नाम।।
करले बचपन नाम , सजाले निज यौवन ।
मात पिता अरु गुरु , नित करो बड़ों का मान।।
स्वर्ग बसा धरा में , हिय बसाले सिया राम ।
जवानी हो जय -जय ,बुढा़पा देख आराम।।

स्वरचित –
शेख जाफर खान

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