Oct 22, 2016 · 1 min read

कुटिल इन्सान कब होता कुटिल तो चाल होती है

कुटिल इन्सान कब होता कुटिल तो चाल होती है
बुराई देखकर इंसानियत बे हाल होती है
करो तुम नेह की बर्षा पिघल जाये कुटिल मन भी
भरा हो नेह दिल में तो मनुजता ढाल होती है
डॉ अर्चना गुप्ता

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