Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings

कुछ लोगों ने सोच लिया है

कुछ लोगों ने सोच लिया है,
कितनी ही कविता कवी बन जाये,
हम नंगे है नंगे ही रहेंगे,
हमारा तो सजेगा बाजार यूँही,
शक़ल से चंगें है चंगें ही रहेंगे।

कुछ लोगों ने सोच लिया है,
चाहे बेटी देखें पती देख जाये,
हम नंगे है नंगे ही रहेंगे,
यूँही फैलएँगे दुनिया भर में बीमारी,
सबकी अकल पर पत्थर पड़ा है
पत्थर यु ही पड़े रहेंगे।

कुछ लोगों ने सोच लिया है,
जीवन चार पल का ही तो होता है,
हम नंगे है नंगे ही रहेंगे,
हम एक पल में निभाएंगे जिम्मेदारी,
हम भी लेखक की तरह ही,
इंतज़ार में गेट पर ही खड़े रहेंगे.

कुछ लोगों ने सोच लिया है,
ढलती उम्र का भी तो तग़ाज़ा है,
हम नंगे है नंगे ही रहेंगे,
आज शरीफ बनने में रखा क्या है,
देखो वो भी गलत है वो भी गलत है,
हमने गलत को चाहा गलत ही देखते रहेंगे।
तनहा शायर हूँ

141 Views
You may also like:
पिता जी
Rakesh Pathak Kathara
एक पनिहारिन की वेदना
Ram Krishan Rastogi
रहे इहाँ जब छोटकी रेल
आकाश महेशपुरी
पिता
Deepali Kalra
दया करो भगवान
Buddha Prakash
यादें वो बचपन के
Khushboo Khatoon
सत्य कभी नही मिटता
Anamika Singh
राम घोष गूंजें नभ में
शेख़ जाफ़र खान
"सूखा गुलाब का फूल"
Ajit Kumar "Karn"
फ़ायदा कुछ नहीं वज़ाहत का ।
Dr fauzia Naseem shad
"वो पिता मेरे, मै बेटी उनकी"
रीतू सिंह
बेटी का पत्र माँ के नाम
Anamika Singh
हर एक रिश्ता निभाता पिता है –गीतिका
रकमिश सुल्तानपुरी
"आम की महिमा"
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
हे तात ! कहा तुम चले गए...
मनोज कर्ण
मर गये ज़िंदगी को
Dr fauzia Naseem shad
इसलिए याद भी नहीं करते
Dr fauzia Naseem shad
पिता
नवीन जोशी 'नवल'
जागो राजू, जागो...
मनोज कर्ण
✍️महानता✍️
'अशांत' शेखर
मुँह इंदियारे जागे दद्दा / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
हमसे न अब करो
Dr fauzia Naseem shad
न जाने क्यों
Dr fauzia Naseem shad
सही-ग़लत का
Dr fauzia Naseem shad
इन्सानियत ज़िंदा है
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
तीन किताबें
Buddha Prakash
✍️जीने का सहारा ✍️
Vaishnavi Gupta
'दुष्टों का नाश करें' (ओज - रस)
Vishnu Prasad 'panchotiya'
पिता है भावनाओं का समंदर।
Taj Mohammad
कोई हमदर्द हो गरीबी का
Dr fauzia Naseem shad
Loading...