Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
18 Jun 2016 · 1 min read

कुछ मुक्तक

औक़ात में ज़्यादा,मगर क़ीमत में जो
सस्ता होगा
दिल में जाने का भी,आसान सा
रस्ता होगा
मुहब्बत देगा,बांटेगा,लुटाएगा यूँ
भर-भर के
वो जिसके क़ल्ब का,एहसास से
रिश्ता होगा।जलज??

जब लगा,जैसा लगा,सब लिख दिया
जो ना कह पाया था कल,अब लिख दिया

आपकी मर्ज़ी,जिसे सजदा करें अब
मैंने हरइक लफ़्ज़ पे,रब लिख दिया।
जलज???

Language: Hindi
Tag: कविता
165 Views
You may also like:
फ़क़ीरी में खुश है वो
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
उसकी मर्ज़ी का
Dr fauzia Naseem shad
पुरी के समुद्र तट पर (1)
Shailendra Aseem
वर्तमान से वक्त बचा लो तुम निज के निर्माण में...
AJAY AMITABH SUMAN
पुस्तक समीक्षा-"तारीखों के बीच" लेखक-'मनु स्वामी'
Rashmi Sanjay
माँ तेरी जैसी कोई नही।
Anamika Singh
सरस्वती कविता
Ankit Halke jha Official's
"प्यारे मोहन"
पंकज कुमार कर्ण
" ना रही पहले आली हवा "
Dr Meenu Poonia
दिल मुझसे लगाकर,औरों से लगाया न करो
Ram Krishan Rastogi
आफत आई( बाल कविता )
Ravi Prakash
अगर तुम प्यार करते हो तो हिम्मत क्यों नहीं करते।...
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
मेरा भारत
Alok Vaid Azad
दीया और अंधेरा
Shekhar Chandra Mitra
कहीं कोई भगवान नहीं है//वियोगगीत
Shiva Awasthi
“पिया” तुम बिन
DESH RAJ
इब्ने सफ़ी
DR ARUN KUMAR SHASTRI
गला रेत इंसान का,मार ठहाके हंसता है
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
श्रमिक जो हूँ मैं तो...
मनोज कर्ण
✍️आसमाँ का हौसला देता है✍️
'अशांत' शेखर
सोचता हूं कैसे भूल पाऊं तुझे
Er.Navaneet R Shandily
भोजन की थाली लगे
Dr. Rajendra Singh 'Rahi'
जिधर भी देखिए उधर ही सूल सूल हो गये
Anis Shah
संकरण हो गया
सिद्धार्थ गोरखपुरी
पक्षी
Sushil chauhan
निद्रा
Vikas Sharma'Shivaaya'
अब मैं बहुत खुश हूँ
gurudeenverma198
अल्फाज़ ए ताज भाग-6
Taj Mohammad
क्यों हो गए हम बड़े
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
सबको दुनियां और मंजिल से मिलाता है पिता।
सत्य कुमार प्रेमी
Loading...