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कुछ बात तो है तुममें प्रिये

कुछ बात तो है तुममें प्रिये…
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कब तुमसे मेरी मुलाकात हुई,
कब मेरा दिल धक से धड़का,
कब आंखो को ख्वाबों ने घेरा,
कब रातें हुईं पराई मेरी,
कब तुमने आकर हौले से,
मेरे कानों में रस घोल दिया,
कब बात बात में मेरा दिल
तुम्हारे दिल से टकराया है,
कब तुमने मेरा दिल जीता,
कब मैं तुम पर आसक्त हुआ,
कब तुम्हारे अधरों पर मैंने
अपने गीतों के बोल सुने,
कब बातों में भी तुम्हारी
जिक्र अपना भी आने लगा,
कब ख्वाबों और खयालों में
तुम हर पल मेरे आन बसीं,
कब रातों की नींदों पर भी
तुमने अपना अधिकार किया,
कब सांझ की बेला भी हरदम
तुम्हारी यादें लेकर आने लगी,
कब ढलते ढलते सूरज भी
यादें तुम्हारी गरमाने लगा,
कब रात का अंधेरा भी
यादों को तुम्हारी समेटने लगा,
कब चांद के चेहरे पर भी
अक्स तुम्हारा ही उभरने लगा,
कब मेरे प्रणय निवेदन को
तुमने सहज स्वीकार लिया,
कब जीवन में आकर के मेरे
मुझको जीवन दान दिया,
मुझको जीवन दान दिया।
कुछ बात तो है तुममें प्रिये
जो इश्क इबादत बन बैठा।
कुछ बात तो है तुममें प्रिये
सफल किया जीवन मेरा।
कुछ बात तो है तुममें प्रिये…

कुछ बात तो है तुममें प्रिये…

संजय श्रीवास्तव
बालाघाट ( मध्य प्रदेश)

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