Nov 21, 2017 · 1 min read

किस्से बहुत है हमारे ज़माने में

किस्से बहुत है हमारे ज़माने में
उनको याद नही आज के फ़साने में

दिल लेकर उड़ गया परिंदा दूर कही
हम आज भी कैद है उनके पैमाने में

नही है आरजू और जीने की
बिखर गए है उनको अपना बनाने में

रूठ गयी है ज़िन्दगी खुद से ही
बीमार है खुद को समझाने में

आरजू है और कुछ भी नही तेरे सिवा
गुज़र गयी ज़िन्दगी तेरे यादों केआशियाने में

ज़िंदा हूँ लेकिन रूह गुलाम है तेरी
अब मैं भी हूँ तेरे निशाने में

भूपेंद्र रावत
12।11।2017

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