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किस्सा / सांग – सारंगा परी # अनुक्रमांक – 16 # टेक – भीड़ पड़ी मै नहीं किसे का दिया साथ लुगाईयां नै| बड़े.2 चक्कर मै गेरे कर मुलाकात लुगाईयां नै।।#

किस्सा / सांग – सारंगापरी # अनुक्रमांक – 16 #

वार्ता:-
सज्जनों! फिर सपनो के बारे मे चित्रसेन के समझाने पर भी सदाव्रत नही मानता है और कहता है कि मेरी सारंगा शहजादी का सपना झूठा नही हो सकता क्यूंकि वह मेरे से पाक महोब्बत करती है| फिर चित्रसेन समझ जाता है कि तेरा दोस्त सदाव्रत तो उस सारंगा परी औरत के चक्कर मे पागल हो गया है| फिर चित्रसेन अपने दोस्त सदाव्रत को इन त्रिया चलित्रो के बारे मे एतिहासिक प्रमाण देते हुए समझाने के कौशिश करता है और सदाव्रत को क्या कहता है।

जवाब:- चित्रसैन का। रागणी – 16

भीड़ पड़ी मै नहीं किसे का दिया साथ लुगाईयां नै,
बड़े.2 चक्कर मै गेरे कर मुलाकात लुगाईयां नै।। टेक ||

तिर्णाबिंदु राजकुमारी से पुलस्त के मन फिरे अक ना,
भस्मासुर भी भस्म होए थे त्रिया कारण मरे अक ना
सिया सती जगदम्बे नै रावण कै खप्पर भरे अक नै,
पूर्वा राजा बंधे वचन मै दुखी शांतनु करे अक नै,
चंद्रकेतु भूप ययाति, और उतानपात लुगाईया नै।।

हूर मेनका नै विश्वामित्र के तप खोए थे,
विषयमोहनी के कारण नारद कै मुह बंदर के होए थे,
लाग्या दाग चांद कै भी इब तक भी ना धोए थे,
ऋषि श्रृंगी दुर्वाशा धुन्ध ऋषि भी मोहे थे,
ब्रह्मा, विष्णु, शिवजी, मच्छन्दरनाथ लुगाईयां नै।।

पछताया विश्वास भरथरी कर पिंगला भी घात गई,
नूणादेवी पूर्णमल कै मसलवा काले हाथ गई,
चंद्रप्रभा मैनपाल से कर धोखे की बात गई,
ब्याहा पति कुएं मै गैरया एक साधु कै साथ गई,
दुनिया धोखेबाज बतावै, न्यूं कमज्यात लुगाईयां नै।।

फूट गेर दे सौ कोसा का भाईचारा करदे सै,
बांस बजाकै बेटे नै मां-बाप तै न्यारा करदे सै,
अापा जापा और बुढापा, सबनै खारा करदे सै,
राजेराम कहै प्यारे का दुश्मन प्यारा करदे सै,
पागल कर दिया देश, कमाई कर दिनरात लुगाईयां नै।।

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