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Nov 20, 2021 · 1 min read

किसान

पारस जैसे उसके हाथ है
बंजर जमीन को भी
बना देता वह मूल्यवान है।
हरियाली होती जब उसके खेत में
खुशहाली आती तब उसके घर में।
हर मौसम को वह अपना दोस्त बनाता
और अपनी फसल लहराता।
तब सही मायनों में वह
किसान कहलाया जाता।
बाढ़, सूखा और कीटाणु से वह
हमेशा हार ही जाता है।
तब घर पर उसके अचानक
मातम छा जाता है।
और तब उस बेचारे को
फांसी-ज़हर अपनाना पड़ जाता है।

– श्रीयांश गुप्ता

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