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16 May 2021 · 1 min read

कितने मादक ये जलधर हैं

कितने मादक ये जलधर हैं,
इठलाते, मँडराते आते,
सोयी पीर जगा कर जाते,
गरज-गरज कर मन भर देते,
पीड़ा के विरही अंतर हैं,
कितने मादक ये जलधर हैं।

ये जलधर रस के वर्षक हैं,
प्रेम-धरा करते उर्वर हैं,
ये ढलकाते मधुका के घट,
प्रणय-विचुंबित इनके स्वर हैं,
कितने मादक ये जलधर हैं।

युगल प्रेमियों के रस-वर्धक,
ये शोभा-सुषमा के वर्षक,
श्वेत-श्याम-कजरारे-कारे
ये मदझर हैं, ये मनहर हैं,
कितने मादक ये जलधर हैं।

6 Likes · 7 Comments · 275 Views

Books from डा. सूर्यनारायण पाण्डेय

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