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काफ़िर जमाना

काफिर जमाने ने मुझे,
काफ़िर बना दिया,
इंसानियत को छोड़कर,
मन्दिर-मस्जिद में भटका दिया।

पत्थर बने हैं भगवान
इंसान को पत्थर बना दिया,
हाथ फैला रहा हूँ खला में,
हाथों से छीनना सिखा दिया।

खींचकर पसीना मजदूरों का
जेब भरना सिखा दिया
जान लेकर बेगुनाहों की
दान करना सिखा दिया।

लड़ रहा हूँ दूसरों से
खुदा को पालने के वास्ते
जो पालता है सबको
उसे मेरी झोली में बिठा दिया।

ये क्या अजीब तौर,
मुझे दुनिया ने सिखा दिया
तलवार दे दी हाथ में,
उसके बच्चों का सिर काटना सिखा दिया।

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