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27 Dec 2022 · 1 min read

काफिला यूँ ही

ग़ज़ल

हो गया कितना बावला यूँ ही
आँख से हो गई खता यूँ ही

लोग मिलते रहे जुदा भी थे
साथ में चलता काफिला यूँ ही

याद फिर रोज वो लगे आने
पहले जिनको भुला दिया यूँ ही

चाह थी गर तो कह दिया होता
भागता क्यों रहा बता यूँ ही

सुन रखा था कि आज देख लिया
दिल को लेते हैं वो चुरा यूँ ही

वक्त ये अब उसे कहाँ लाया
डूबता प्यार में रहा यूँ ही

था वो सुधा वो कलाकार बड़ा
मुझको अपना बना लिया यूँ ही

डा. सुनीता सिंह ‘सुधा’
वाराणसी

Language: Hindi
1 Like · 41 Views

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