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कान्हा

कान्हा कहाँ है गुल ?
फिर सुदामा से मिल ।
जीवन संग्राम ,
अर्जुन सा लड़ूँगा ,
फिर सारथी बन के मिल।
करुंगा मन की बातें,
फिर दोस्त बन के मिल ।
अब आन पड़ी धरा पे
आने में देर न कर ।

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