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22 Jul 2016 · 1 min read

कहो कैसे जिए इस ज़िन्दगी को

कहो कैसे जिए इस ज़िन्दगी को
ज़रूरत आपकी है आशिकी को

मिटाकर फ़ासले आराम दे दो
बहुत मुश्किल है सहना बेरुखी को

बहाकर आसमां आँसू मुसलसल
बुझाता है जमीं की तिश्नगी को

सजाकर अपने होठों पर कभी तो
अमर कर दो हमारी शायरी को

गुजारा आप बिन होता नहीं है
करे दिल तोड़ दे ‘माही’ घडी को

माही

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