Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
24 Feb 2023 · 1 min read

💐प्रेम कौतुक-241💐

कहीं चलो चले इश्क़ में हज़ार रंग यों भरें,
हवा हवा में घूमकर ख़्याल ख़्याल जोड़ लें।

©®अभिषेक: पाराशरः “आनन्द”

Language: Hindi
144 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
लोग कह रहे हैं आज कल राजनीति करने वाले कितने गिर गए हैं!
लोग कह रहे हैं आज कल राजनीति करने वाले कितने गिर गए हैं!
Anand Kumar
माँ
माँ
shabina. Naaz
💐अज्ञात के प्रति-125💐
💐अज्ञात के प्रति-125💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
Who is whose best friend
Who is whose best friend
Ankita Patel
कहां जीवन है ?
कहां जीवन है ?
Saraswati Bajpai
अद्य हिन्दी को भला एक याम का ही मानकर क्यों?
अद्य हिन्दी को भला एक याम का ही मानकर क्यों?
संजीव शुक्ल 'सचिन'
सागर की ओर
सागर की ओर
सुशील मिश्रा (क्षितिज राज)
राखी धागों का त्यौहार
राखी धागों का त्यौहार
Mukesh Kumar Sonkar
ग़ज़ल
ग़ज़ल
इंजी. लोकेश शर्मा (लेखक)
कितना सकून है इन , इंसानों  की कब्र पर आकर
कितना सकून है इन , इंसानों की कब्र पर आकर
श्याम सिंह बिष्ट
अपनी टोली
अपनी टोली
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
पिताजी
पिताजी
विनोद शर्मा सागर
मातृभूमि तुझ्रे प्रणाम
मातृभूमि तुझ्रे प्रणाम
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
हम भी नज़ीर बन जाते।
हम भी नज़ीर बन जाते।
Taj Mohammad
गुम लफ्ज़
गुम लफ्ज़
Akib Javed
खुशकिस्मत है कि तू उस परमात्मा की कृति है
खुशकिस्मत है कि तू उस परमात्मा की कृति है
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
हर कभी ना माने
हर कभी ना माने
Dinesh Gupta
*अदरक (बाल कविता)*
*अदरक (बाल कविता)*
Ravi Prakash
✍️कथासत्य✍️
✍️कथासत्य✍️
'अशांत' शेखर
India is my national
India is my national
Rajan Sharma
बूँद-बूँद से बनता सागर,
बूँद-बूँद से बनता सागर,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
द कुम्भकार
द कुम्भकार
Satish Srijan
ग़रीब
ग़रीब
Artist Sudhir Singh (सुधीरा)
■ आज की बात
■ आज की बात
*Author प्रणय प्रभात*
【28】 *!* अखरेगी गैर - जिम्मेदारी *!*
【28】 *!* अखरेगी गैर - जिम्मेदारी *!*
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
मेरा तुझसे मिलना, मिलकर इतना यूं करीब आ जाना।
मेरा तुझसे मिलना, मिलकर इतना यूं करीब आ जाना।
AVINASH (Avi...) MEHRA
भर मुझको भुजपाश में, भुला गई हर राह ।
भर मुझको भुजपाश में, भुला गई हर राह ।
Arvind trivedi
*मनुष्य शरीर*
*मनुष्य शरीर*
Shashi kala vyas
দিগন্তে ছেয়ে আছে ধুলো
দিগন্তে ছেয়ে আছে ধুলো
Sakhawat Jisan
*......कब तक..... **
*......कब तक..... **
Naushaba Suriya
Loading...