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12 Feb 2023 · 1 min read

💐अज्ञात के प्रति-92💐

कहीं का नहीं छोड़ा गया है मुझको,
एक घाव भरना था,हर जगह घाव भर दिए।

©®अभिषेक: पाराशरः ‘आनन्द’

Language: Hindi
66 Views
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