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कहाँ हो बेटा

कहाँ हो तुम
शून्य में मुस्कुराहट को
ढूढता एक पिता
जिसने सुबह तक
देखी हो उसकी चंचलता को
एक पल में विवश हो गया
चाहता हैं कुछ कहना
सुने कौन
सभी हैं मौन
कौन देगा जबाब उस माँ को
जिसने अपने हाथों से
रोज नहलाती थी
उसे सवारती थी
सजाती थी
सुनती थी उसकी प्यारी बातें
देखी थी लाखों सपने
कोई तो जबाब दे उसे
आज उसका मस्तिष्क काम नहीं कर रहा है
वह भी चाहती है खुद को मिटाना
समय मौन है
हाथ से छूट गया हाथ हैं
इस जख्म की है कोई दवा
दे दे उस माँ कोई
या बता उसका दोष
माँ होने का

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