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Oct 7, 2016 · 1 min read

कशमकश

कशमकश है यह कैसी
ना पता कया कशमकश थी…
आज जो उनने कहा ठीक था..
सचताई तो दिल से निकल जाती है…
बस बताने की तो बस जरूरत थी..
बातें ही बातों मे वो आयना हमें…
दिखा गए हमारी औकात समझा गए..

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