Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
Jul 26, 2022 · 1 min read

तुम स्वर बन आये हो

प्राणों की बंजर बस्ती में
स्वर बनकर तुम आये हो ।
क्षुधा शान्त करने को मन की
स्नेह बीज बन आए हो ।
अपलक छवि निरख कर तेरी
पूर्ण हुई प्रतीक्षित साध ।
संग में जब से तुम आए हो
पंथ हुए सारे निर्बाध ।
तुममय ही सब गोचर वृत्ति
एकनिष्ठ हो तुममें रमती ।
जीवन मूर्च्छा से लड़ने को
प्राणों सा मुझमें तुम्हें भरती ।
अब निश्चय भाग्य उदित होंगे
मूर्च्छा जीवन से जाएगी ।
प्राणों की बंजर ये बस्ती
लगता फिर से बस जाएगी।

2 Likes · 4 Comments · 61 Views
You may also like:
पुस्तक समीक्षा-"तारीखों के बीच" लेखक-'मनु स्वामी'
Rashmi Sanjay
तुम्हारी बात
सिद्धार्थ गोरखपुरी
क्यों भावनाएं भड़काते हो?
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
पुस्तक समीक्षा *तुम्हारे नेह के बल से (काव्य संग्रह)*
Ravi Prakash
हौसलों की उड़ान।
Taj Mohammad
कातिल बन गए है।
Taj Mohammad
मेरी ये जां।
Taj Mohammad
“ कॉल ड्यूटी ”
DrLakshman Jha Parimal
विषय:सूर्योपासना
Vikas Sharma'Shivaaya'
चल कहीं
Harshvardhan "आवारा"
मुझको ये जीवन जीना है
Saraswati Bajpai
*श्री विष्णु शरण अग्रवाल सर्राफ के गीता-प्रवचन*
Ravi Prakash
हे ईश्वर!
Anamika Singh
- साहित्य मेरी जान -
bharat gehlot
💐"गीता= व्यवहारे परमार्थ च तत्वप्राप्ति: च"💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
लाख सितारे ......
लक्ष्मण 'बिजनौरी'
सफर में।
Taj Mohammad
पर्यावरण और मानव
मनमोहन लाल गुप्ता अंजुम
काश तुम
Dr fauzia Naseem shad
नन्हा बीज
मनोज कर्ण
Only for L
श्याम सिंह बिष्ट
मोहब्बत का गम है।
Taj Mohammad
बेचैनियाँ फिर कभी
Dr fauzia Naseem shad
रूबरू होकर जमाने से .....
लक्ष्मण 'बिजनौरी'
तलाश
Dr. Rajeev Jain
✍️मैं जलजला हूँ✍️
'अशांत' शेखर
वरिष्ठ गीतकार स्व.शिवकुमार अर्चन को समर्पित श्रद्धांजलि नवगीत
ईश्वर दयाल गोस्वामी
बस एक ही भूख
DESH RAJ
तुम न आये मगर..
लक्ष्मी सिंह
नयी बहुरिया घर आयी*
Dr. Sunita Singh
Loading...