Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings

कविता… राजभाषा हिंदी

अपनी हिन्दी
*********
फूलों से महकता चमन है हिन्दी।
हर शब्द है फूल इसका,भरलो हृदय गागरी।
मिलजुल बोलो तुम,जय हिन्दी,जय देवनागरी।

आन-बान-शान है भारत की पहचान है।
है वैज्ञानिक तभी तो जग में,गाया जाए रागरी।
मिलजुल बोलो तुम,जय हिन्दी,जय देवनागरी।

चौदह सितम्बर उन्नीस सौ उनचास का जन्म।
संविधान की धारा ३४३ में,संज्ञा राजभाषा की जरी।
मिलजुल बोलो तुम,जय हिन्दी,जय देवनागरी।

तृतीय से प्रथम स्थान पर जग में छाने को हिन्दी।
चमक रही बन माथे की बिन्दी,उज्ज्वल हैं भागरी।
मिलजुल बोलो तुम,जय हिन्दी,जय देवनागरी।।

उच्चारण और लेखन में एकमत है हिन्दी का।
जिससे सिर उन्नत है हिन्दी का,नहीं है कोई दागरी।
मिलजुल बोलो तुम,जय हिन्दी,जय देवनागरी।

*******************************
राधेश्याम बंगालिया “प्रीतम” कृत
सर्वाधिकार सुरक्षित कविता
************************************

785 Views
You may also like:
दर्द लफ़्ज़ों में लिख के रोये हैं
Dr fauzia Naseem shad
हमनें ख़्वाबों को देखना छोड़ा
Dr fauzia Naseem shad
माखन चोर
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
मजबूर ! मजदूर
शेख़ जाफ़र खान
चलो एक पत्थर हम भी उछालें..!
मनोज कर्ण
ज़िंदगी को चुना
अंजनीत निज्जर
"हैप्पी बर्थडे हिन्दी"
पंकज कुमार कर्ण
बूँद-बूँद को तरसा गाँव
ईश्वर दयाल गोस्वामी
कुछ पल का है तमाशा
Dr fauzia Naseem shad
श्रीराम गाथा
मनोज कर्ण
घनाक्षरी छंद
शेख़ जाफ़र खान
ब्रेकिंग न्यूज़
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
धरती की अंगड़ाई
श्री रमण 'श्रीपद्'
उसकी मर्ज़ी का
Dr fauzia Naseem shad
किसी का होके रह जाना
Dr fauzia Naseem shad
पापा को मैं पास में पाऊँ
Dr. Pratibha Mahi
फहराये तिरंगा ।
Buddha Prakash
बेजुबां जीव
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
✍️सूरज मुट्ठी में जखड़कर देखो✍️
'अशांत' शेखर
मेरा गुरूर है पिता
VINOD KUMAR CHAUHAN
दो पल मोहब्बत
श्री रमण 'श्रीपद्'
मां की ममता
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
दीवार में दरार
VINOD KUMAR CHAUHAN
मजदूरों का जीवन।
Anamika Singh
जीवन की प्रक्रिया में
Dr fauzia Naseem shad
आत्मनिर्भर
मनोज कर्ण
रूठ गई हैं बरखा रानी
Dr Archana Gupta
✍️वो इंसा ही क्या ✍️
Vaishnavi Gupta
पिता के चरणों को नमन ।
Buddha Prakash
जितनी मीठी ज़ुबान रक्खेंगे
Dr fauzia Naseem shad
Loading...